Saturday, 2 August 2014

कुछ अच्छा कर के दिखलाओ....(मेहर)

कुछ अच्छा कर के दिखलाओ....
(राग प्रभाती)
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यदि सामर्थ्य तुझे जतलाना है 
कुछ अच्छा कर के दिखलाओ 
झूठ को खूब जीया तुमने 
अब सच्चा जी कर दिखलाओ !! स्थायी!!

साँसे तो आनी जानी है
दौलत तो प्यारे फानी है,
याद करे दुनिया तुझ को
ऐसे करमों को अपनाओ !!१!!

नशा चढ़ा अभिमान का है
लगता क्यूँ तू असमान का है  
झूठे भरमों को तज कर तुम
असली धरती पर आ जाओ !!२!!

प्रेम से ऊँचा कुछ भी नहीं
सौहार्द से बढ़कर कुछ भी नहीं
हिल मिल दुःख सुख बाँटो प्राणी 
तुम स्वार्थ वृति को तज जाओ !!३!!

यह मेरा है यह तेरा है
दुनिया करमों का फेरा है
जो आज लिया वो कल देना 
हिसाब को समझो समझाओ  !!४!!

क्षमा करुणा निज घट में रहे
स्नेह के गंगा तट में रहें 
तीरथ सारे है पास तेरे 
डुबकी लेकर के दिखलाओ !!५!! 

खुद कि चिंता में जीता है
मय खुदगर्जी की पीता है 
ऐसा जीना है क्या जीना 
वैसा जीकर अब दिखलाओ  !!६!!

औरों के आंसू पोछ सको 
भला सभी का सोच सको
बहुत लिया तुम ने बन्दे 
अब देकर थोडा दिखलाओ  !!७!!

यदि सामर्थ्य तुझे जतलाना है 
कुछ अच्छा कर के दिखलाओ 
झूठ को खूब जीया तुमने 
अब सच्चा जी कर दिखलाओ.

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