Saturday, 2 August 2014

तुम नहीं आये ! (मेहर)

तुम नहीं आये !
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निशा बीती
प्यासी प्यासी,
छाई रही 
हर पल उदासी, 
नहीं आना था 
तुम को 
सजना, 
तुम 
नहीं आये !

प्रतीक्षा थी 
तुम्हारी 
प्रति पल,  
दे रही थी 
साथ शम्मा 
जल जल,
पलकों पर 
नींद लिए,
तेरी राहो में 
मैंने 
व्याकुल नयन 
बिछाये,
तुम 
नहीं आये !

मिलन दर्शन को
उत्सुक
आई थी 
चंचल चांदनी,
हो कर मलिन 
लौटी थी 
बेचारी
अनमनी,
गगन के 
चमकते 
सितारे भी,
थक कर
निढाल 
मुरझाये,
तुम 
नहीं आये !

रति तृप्त
कँवल 
शिथिल हुआ था,
निकल 
आगोश से 
भंवरा उड़ा था, 
चकवा 
चकवी को 
मिलते देखा,
मोरे 
नयना
नीर भर लाये,
तुम
नहीं आये !

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