तुम नहीं आये !
#######
निशा बीती
प्यासी प्यासी,
छाई रही
हर पल उदासी,
नहीं आना था
तुम को
सजना,
तुम
नहीं आये !
प्रतीक्षा थी
तुम्हारी
प्रति पल,
दे रही थी
साथ शम्मा
जल जल,
पलकों पर
नींद लिए,
तेरी राहो में
मैंने
व्याकुल नयन
बिछाये,
तुम
नहीं आये !
मिलन दर्शन को
उत्सुक
आई थी
चंचल चांदनी,
हो कर मलिन
लौटी थी
बेचारी
अनमनी,
गगन के
चमकते
सितारे भी,
थक कर
निढाल
मुरझाये,
तुम
नहीं आये !
रति तृप्त
कँवल
शिथिल हुआ था,
निकल
आगोश से
भंवरा उड़ा था,
चकवा
चकवी को
मिलते देखा,
मोरे
नयना
नीर भर लाये,
तुम
नहीं आये !
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निशा बीती
प्यासी प्यासी,
छाई रही
हर पल उदासी,
नहीं आना था
तुम को
सजना,
तुम
नहीं आये !
प्रतीक्षा थी
तुम्हारी
प्रति पल,
दे रही थी
साथ शम्मा
जल जल,
पलकों पर
नींद लिए,
तेरी राहो में
मैंने
व्याकुल नयन
बिछाये,
तुम
नहीं आये !
मिलन दर्शन को
उत्सुक
आई थी
चंचल चांदनी,
हो कर मलिन
लौटी थी
बेचारी
अनमनी,
गगन के
चमकते
सितारे भी,
थक कर
निढाल
मुरझाये,
तुम
नहीं आये !
रति तृप्त
कँवल
शिथिल हुआ था,
निकल
आगोश से
भंवरा उड़ा था,
चकवा
चकवी को
मिलते देखा,
मोरे
नयना
नीर भर लाये,
तुम
नहीं आये !
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