नहीं खेलनी होली
# # # # #
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(१)
लूट मची है चहुँ दिशाएं
खेले खर्चे और वो पाये,
उधार करे और इतराये,
चढ़ी थोथे पर खोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(२)
यहाँ घोटाले वहां घोटाले,
झूठे चमके सच्चे टाले,
चोरों के आगे क्या ताले,
है कैसी आँख मिचौली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(३)
लहू बिखरा है राह चौरस्ते
देखो मानव कितने सस्ते
लाल रंग को देखते सहते
हुयी अवरुद्ध है बोली
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(४)
कौन पकाए कौन परोसे,
सब कुछ है अब भाग्य भरोसे,
चूंटे पुजारी नेता चूसे,
लगे जनता की यहाँ बोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(५)
है कैसी गिनती पेटियों की,
लुटती ज्यूँ इज्ज़त बेटियों की,
फिरे लुटेरे है घर द्वारे
उड़े गिद्ध की टोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(६)
सम्बन्ध बने हैं नागपाश ज्यूँ,
जीवन हो गया मिटी आस ज्यूँ ,
दुःख में करे विलाप है कोई,
करता कोई हंसी ठिठौली.
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(१) मोर्गेज इकोनोमी याने उधार/क्रेडिट कार्ड की अर्थव्यवस्था को दर्शा रहा है.
(२) हाल ही में हुए घोटालों, चोरी सीनाजोरी के ज़ज्बों और हमारे ईमानदार प्रधान मंत्री क़ी मजबूरी में टालमटोल करने को दर्शा रहा है.
(३) व्याप्त हिंसा, अराजकता और आतंक को दर्शा रहा है.
(४) गैर जिम्मेदार और स्वार्थी पुजारी और नेता (Priest and politicians ) अपने क्षुद्र हितों को साधने के लिए जनता को कैसे नीलम करते हैं उसे दर्शा रहा है.
(५) वोटों के जनतंत्र की असंगतियाँ और विडम्बनाओं को दर्शा रहा है.
(६) मानवीय संबंधों और संवेदनाके मूल्यों में गिरावट को दर्शा रहा है.
# # # # #
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(१)
लूट मची है चहुँ दिशाएं
खेले खर्चे और वो पाये,
उधार करे और इतराये,
चढ़ी थोथे पर खोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(२)
यहाँ घोटाले वहां घोटाले,
झूठे चमके सच्चे टाले,
चोरों के आगे क्या ताले,
है कैसी आँख मिचौली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(३)
लहू बिखरा है राह चौरस्ते
देखो मानव कितने सस्ते
लाल रंग को देखते सहते
हुयी अवरुद्ध है बोली
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(४)
कौन पकाए कौन परोसे,
सब कुछ है अब भाग्य भरोसे,
चूंटे पुजारी नेता चूसे,
लगे जनता की यहाँ बोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(५)
है कैसी गिनती पेटियों की,
लुटती ज्यूँ इज्ज़त बेटियों की,
फिरे लुटेरे है घर द्वारे
उड़े गिद्ध की टोली,
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(६)
सम्बन्ध बने हैं नागपाश ज्यूँ,
जीवन हो गया मिटी आस ज्यूँ ,
दुःख में करे विलाप है कोई,
करता कोई हंसी ठिठौली.
नहीं खेलनी होली
मैय्या
नहीं खेलनी होली.
(१) मोर्गेज इकोनोमी याने उधार/क्रेडिट कार्ड की अर्थव्यवस्था को दर्शा रहा है.
(२) हाल ही में हुए घोटालों, चोरी सीनाजोरी के ज़ज्बों और हमारे ईमानदार प्रधान मंत्री क़ी मजबूरी में टालमटोल करने को दर्शा रहा है.
(३) व्याप्त हिंसा, अराजकता और आतंक को दर्शा रहा है.
(४) गैर जिम्मेदार और स्वार्थी पुजारी और नेता (Priest and politicians ) अपने क्षुद्र हितों को साधने के लिए जनता को कैसे नीलम करते हैं उसे दर्शा रहा है.
(५) वोटों के जनतंत्र की असंगतियाँ और विडम्बनाओं को दर्शा रहा है.
(६) मानवीय संबंधों और संवेदनाके मूल्यों में गिरावट को दर्शा रहा है.
No comments:
Post a Comment