किन्तु दोष नहीं....
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कितना ही झिंझोड़ा
लहर ने
किन्तु
मौन रहता है किनारा,
काश जान पाती लहर
उसके नृत्य का
हेतु है वही किनारा
काश समझ पाती
उसकी करवट का
वो ही तो है सबल सहारा,
किन्तु दोष नहीं
लहर का
होता दीवाना जोश है...
पाँव ने कुचला मार्ग को
किन्तु मार्ग था मौन रहा
काश जान पाता पथिक
राह उसकी यात्रा का आधार है
सहयात्री है
संगी है
एक ही गंतव्य
यही वस्तुतः सार है,
किन्तु दोष नहीं
पथिक का
होते पाँव बेहोश है...
कंटक के भाग्य पर
देखो
पुष्प को अति खेद है,
हंस हंस कर
करता है व्यंग
नहीं जानता भेद है,
शूल मुकुट
पुष्प सम्राज्ञी का
सौन्दर्य का प्रतीक है
किन्तु दोष नहीं
पुष्प का
स्वयं वह तो मदहोश है...
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