एक सोच...
# # #सुनते हैं
निशि दिन
हो रहे हैं
समाप्त
सघन विकट
वन,
विलुप्त
हो रहे
जंगली
हिंसक
जानवर,
ना !
हुआ नहीं है
कुछ भी
ऐसा,
बस
बाहर से आक़र
बस गए हैं वे
अंतर में
हमारे..
# # #सुनते हैं
निशि दिन
हो रहे हैं
समाप्त
सघन विकट
वन,
विलुप्त
हो रहे
जंगली
हिंसक
जानवर,
ना !
हुआ नहीं है
कुछ भी
ऐसा,
बस
बाहर से आक़र
बस गए हैं वे
अंतर में
हमारे..
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