मैं जोगन प्रीतम की....
# # #
डोले री
पुनि पुनि
मेरा यह
निर्बल सा
नन्हा सा जिया,
ना जाने कब
साँझ सवेरे
आवेंगे
मोरे पापी पिया,
आज इस
सूनी सी
महफ़िल को
बतला री
मैं क्यूँ ना
सजा लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना,
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
ना जाने
आये ना आये
बाँहों में
मुझ को
भर पाये,
पिया की
प्रिय प्रतीक्षा में
परवानों को
प्रियतम से उनके
क्यूँ ना री
मैं
आज
मिला लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
खाली हिरदै में
नेह भरूँ मैं,
फिर लौ को
प्रज्जवलित करूँ मैं,
मैं प्यासी हूँ
अनंत काल की
क्यूँ ना
इन प्यासे
शलभों की
मेरी सी यह
प्यास मिटा लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
जौहर होगा
शलभों का
जल जल,
भस्म वही
तन पर
मल मल,
बन जाऊं
मैं जोगन
प्रीतम की,
तुझ को
मन की बात
बता लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
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डोले री
पुनि पुनि
मेरा यह
निर्बल सा
नन्हा सा जिया,
ना जाने कब
साँझ सवेरे
आवेंगे
मोरे पापी पिया,
आज इस
सूनी सी
महफ़िल को
बतला री
मैं क्यूँ ना
सजा लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना,
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
ना जाने
आये ना आये
बाँहों में
मुझ को
भर पाये,
पिया की
प्रिय प्रतीक्षा में
परवानों को
प्रियतम से उनके
क्यूँ ना री
मैं
आज
मिला लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
खाली हिरदै में
नेह भरूँ मैं,
फिर लौ को
प्रज्जवलित करूँ मैं,
मैं प्यासी हूँ
अनंत काल की
क्यूँ ना
इन प्यासे
शलभों की
मेरी सी यह
प्यास मिटा लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
जौहर होगा
शलभों का
जल जल,
भस्म वही
तन पर
मल मल,
बन जाऊं
मैं जोगन
प्रीतम की,
तुझ को
मन की बात
बता लूँ,
अलि मेरी
सुन ना तू
क्यूँ ना
मैं
माटी का
दीप जला लूँ...
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