तकदीर की बात..
# # #
हर सवाल का
होता नहीं
कोई मुक्कमल
जवाब,
हर रात
पाती नहीं
चांदनी का
साथ,
ज़रूरी नहीं
खिल पाए
हर इक गुंचा,
होती है
यह तो
वक़्त
और
तकदीर की
बात..
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हर सवाल का
होता नहीं
कोई मुक्कमल
जवाब,
हर रात
पाती नहीं
चांदनी का
साथ,
ज़रूरी नहीं
खिल पाए
हर इक गुंचा,
होती है
यह तो
वक़्त
और
तकदीर की
बात..
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