Saturday, 2 August 2014

देखी मेरी प्रीत ? (मेहर)

देखी मेरी प्रीत ?
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तेरे दिए दर्द से हो गया 
अस्तित्व मेरा यूँ घायल
नाग फाँस सी लिपटी है 
मेरे पांवों की पायल 
अब थम सी गयी मैं मीत 
देखी मेरी प्रीत ?

हंसिनी मेरे गीतों की
अश्रु मोती चुगती है
व्यथा बीन की धुन पर मेरी 
श्वास नागिन थिरकती है
नहीं अब जी रही मैं अतीत 
देखी मेरी प्रीत ?

तुम्हे नहीं है ज्ञात 
तुम्हारे शाप बने वरदान 
खाकर पद ठोकर तेरी
जगा है स्वाभिमान 
अब व्यर्थ है जग़ की रीत
देखी मेरी प्रीत ?

निष्ठुरता तेरी प्रीतम
राह भटकी ममता है
मधुरिम श्रोत प्रेम का
क्यों यूँ भर बैठा कटुता है,
भंगित साज...भटकते गीत 
देखी मेरी प्रीत ?

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