vinod's feels and words

Saturday, 18 November 2023

खोया हुआ महबूब...

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 खोया हुआ महबूब  ************** बरसों के अंतराल के बाद  छुआ है तुम को  कितने बदल गये हो, कहाँ गया कच्चापन-अधूरापन  नहीं नज़र आ रहा है वो अल्...

मैं हूँ राधा : विजया

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 मैं हूँ राधा... +++++ मैं हूँ प्रेम की पूर्ण परिभाषा  मैं हूँ प्रेम की आबोली अनलिखी भाषा... मैं हूँ राधा, मैं नहीं हूँ आकर्षण  रूप और यौवन ...
Monday, 2 October 2023

भीतर और बाहर

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 भीतर और बाहर  ######### सत्य जीवन के  नहीं पाए जा सकते हैं बाहर  तारों और ग्रहों के विस्तृत अध्ययन में  वे तो समाये होते हैं  हमारे ही भीतर...

कौन थी राधा : क्या थी राधा

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 कौन थी राधा : क्या थी राधा  ********************* नहीं थी राधा कोई दैहिक स्त्री  प्रतीक थी वह तो कृष्ण भाव की... स्त्री अंग होता है प्रत्ये...

सहोदरी...

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सहोदरी  ###### सहोदरी ! मेरी प्यारी दीदी! पहली बारिश की रिमझिम है  मन भी हुआ मयूर सम है  अन्दर बाहर झम झम है  दिल चाहे नाचना छम छम है  मेह न...

माटी का पुत्र : विजया

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 लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म जयंती पर  ********************************* माटी का पुत्र  +++++++ क्यों चल दिया अचानक  धरा विदेशी पर  आज ही...
Sunday, 10 September 2023

बोथ वे ट्रैफिक : विजया

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 बोथ वे ट्रैफिक.... +++++++++ खूब सुने हैं "सरमन" पढ़ा, जाना और समझा भी है  गूढ़ ज्ञान उस ऊँचे वाले प्रेम का  जो हुआ करता है  अप्र...
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Vinod Singhi
An ordinary individual with extra-ordinary way of looking at things.
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