vinod's feels and words
Sunday, 10 September 2023
बोथ वे ट्रैफिक : विजया
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बोथ वे ट्रैफिक.... +++++++++ खूब सुने हैं "सरमन" पढ़ा, जाना और समझा भी है गूढ़ ज्ञान उस ऊँचे वाले प्रेम का जो हुआ करता है अप्र...
सपने और हक़ीक़त
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सपने और हक़ीक़त : एक और आयाम ###################### सपने नहीं रहते फ़क़त सपने बन जाते हैं वे जब हक़ीक़त ज़िंदगी की ना बिखरते हैं ना टूटत...
Monday, 24 July 2023
उत्तर माँगती है हर स्त्री : विजया
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उत्तर माँगती है हर स्त्री ++++++++++++ सीता तू संस्कारी ही रही और राम, ना जाने क्यों आप रहे मात्र पुरुष परम्परावादी ? स्वीकारा था वनवास...
Friday, 21 July 2023
आग सावन की : आकृति
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आग सावन की ----------- भीगे तन भीगे मन भीगे नयन, होता है तरल ईंधन रंगहीन गंधहीन ठंडा ठंडा लगता कहलाता है जो पानी सावन रूत में बरसा क...
कृष्ण नीति : आकृति
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कृष्णनीति -------- नहीं समझते कोई दोष श्री कृष्ण अधर्मी को मारने में छल हो तो छल से, कपट हो तो कपट से, अनीति हो तो अनीति से, अधर्मी को न...
नज़रिया : विजया
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नज़रिया +++++ एक घड़ा जल से भरा एक कटोरी घड़े को ढके, दोनों ही अर्थपूर्ण दोनों का ही काम महत्वपूर्ण... घड़ा जानता था बहुत ही अहम है ...
Sunday, 9 July 2023
सुहानी हरियाली : विजया
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🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹 दोस्ती उस से भी पहले की है और आज भी वही प्राथमिक है .हाँ आज से ५२ साल पहले हम दोनों के रिश्ते पर समाज और ...
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